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puneetmanav


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काश माँ WhatsApp पर होती

Posted On: 22 Jul, 2015  
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सावधानः प्लास्टिक जानलेवा है

Posted On: 3 May, 2015  
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कुछ तीखा हो जाए

Posted On: 23 Apr, 2015  
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हमारा तो पुलाव भी ख्याली

Posted On: 21 Apr, 2015  
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राहुल गांधी रिटर्न्स

Posted On: 18 Apr, 2015  
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कश्मीर पर कलह जारी है

Posted On: 18 Apr, 2015  
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कश्मीर पर कलह जारी है

Posted On: 18 Apr, 2015  
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वेलकम बैक राहुल

Posted On: 16 Apr, 2015  
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वेलकम बैक राहुल

Posted On: 16 Apr, 2015  
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प्रकृति कुछ कहना चाहती है शायद।

Posted On: 16 Apr, 2015  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: puneetmanav puneetmanav

के द्वारा: shalinikaushik shalinikaushik

कुछ ने बचपन में गरीबी या अन्य कारणों से पढ़ाई नहीं की तो कुछ को मजबूरी में इन पेशों को अपनाना पड़ा। कारण कुछ भी हों पर सवाल ये उठता है कि क्या अब ऐसे लोगों के पास भूखों मरने के सिवा कोई चारा है? जवाब यह है कि अगर हम और आप मजबूरी के मारे इन लोगों की मानवता के नाते थोड़ी सहायता करेंगे तो कम से कम ऐसे लोगों को दर दर ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी। मदद करने से मेरा तात्पर्य यह कत्तई नहीं है कि हमें ऐसे लोगों को भीख देनी चाहिये या ऐहसान के तौर पर उनकी सहायता करनी चाहिए। कहने का अर्थ सिर्फ इतना सा है कि दौर में जब हमारी नौजवान पीढ़ी नौकरी न मिलने पर फौरन चोरी,डकैती और चेन स्नैचिंग जैसी चीजों पर हाथ आजमाने चल देती है। ऐसे में कुछ लोग है जो आज भी गलत रास्ते को चुनने की बजाय मेहनत करके ईमानदारी से दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं। आपने फिल्म नया दौर की बात को दोहराया दिया है ! लेकिन सटीक और व्यवस्थित लिखा है आपने ! ये भारत ही है जहां तकनीक लोगों को भूखा मार रही है क्यूंकि जनसँख्या इतनी ज्यादा है अन्यथा तो तकनीक हमेशा ही मानव जीवन को सुगम और सरल बनाने के लिए होती है !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: puneetmanav puneetmanav




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